किसी भी सरकार
ने केंद्र की
किसी भी सरकार
के खिलाफ इतनी
तीखी लड़ाई कभी
नहीं छेड़ी। पहली
बार हुआ जब
पूरी कैबिनेट ही
सड़क पर बैठी
और ये भी
पहली बार हुआ
कि किसी राज्य
की पुलिस ने
अपने एक मंत्री
को प्रदर्शन करने
के लिए हिरासत
में लिया हो।
दिल्ली में कड़ाके
की सर्दी और
बारिश के बीच
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सड़क
पर जमे हुए
है और खुले
तौर पर ऐलान
किया है कि
अगर मांगे नहीं
मानी गईं तो
राजपथ पर जनसैलाब
उमड़ेगा। धरने में
केजरीवाल का साथ
देने उनकी पत्नी
सुनीता भी पहुंची
है। सुनिता पहली
बार केजरीवाल के
किसी धरने में
शामिल हो रही
हैं। इस पूरे
मामले में जो
सबसे अहम बात
है वो ये
है कि मुख्यमंत्री
अरविंद केजरीवाल सत्ता पाने
से पहले भी
सड़क पर थे
और सत्ता के
बाद भी सड़क
पर हैं क्योंकि
राजनीति में अरविंद
केजरीवाल का जन्म
आंदोलन की कोख
से हुआ है।
अरविंद केजरीवाल ने पूरी
रात सडक पर
सोकर बिताई। सुबह
जब वो सोकर
उठे तो उन्होंने
कहा कि वह
अधिकार की लड़ाई
नहीं लड़ रहे
हैं बल्कि वह
लोगों को पुलिस
के अत्याचार से
बचाना चाहते है।
उन्होंने कहा कि
अगर तीन अधिकारियों
का निलंबन या
स्थानांतरण नहीं किया
जा सकता तो
अपराध कैसे रुकेंगे।
केजरीवाल ने कहा
कि जनता के
धैर्य की परीक्षा
न ली जाए।
वे गृहमंत्री सुशील
कुमार शिंदे को
भी चेन से
नहीं सोने देंगे।
केजरीवाल के अलावा
उनके मंत्रिमंडल के
अन्य सहयोगियों ने
भी धरना स्थल
पर खुले आसमान
के नीचे रात
बिताई। उनके समर्थक
भी रातभर वहीं
डटे रहे।
Tuesday, 21 January 2014
लेख की श्रेणियाँ: दिल्ली समाचार
अरविंद केजरीवाल: सत्ता से पहले भी सड़क पर और सत्ता के बाद भी सड़क पर
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