शुक्रवार, 25 अप्रैल, 2014
उत्तराखंड में नैनीताल
लोकसभा सीट से
आम आदमी पार्टी
के टिकट पर
चुनाव लड़ रहे
उम्मीदवार ने अपनी
गिरफ़्तारी के बाद
ज़मानत पर बाहर
आने से इनकार
कर दिया है
और पार्टी के
राष्ट्रीय नेताओं से इस
मामले में चुप्पी
तोड़ने की मांग
की है.
राज्य में आम
आदमी पार्टी के
चुनाव समन्वयक शमशेर
सिंह बिष्ट ने
इस पूरे वाक़ये
के बारे में
बताया, ''ये घटना
19 अप्रैल की है.
चीमा अपने साथियों
के साथ प्रचार
कर रहे थे.
रुद्रपुर के पास
एक चौराहे पर
भाजपा के कुछ
लोगों ने लाठियों
से उन पर
हमला करने की
कोशिश की. लोग
चले गए और
मामला शांत हो
गया.''वे बताते
हैं, ''20 अप्रैल को पुलिस
के एक सर्किल
ऑफिसर आते हैं
और चीमा की
प्रचार गाड़ी को रोककर
गाड़ी के काग़ज़ात
मांगे. ड्राइवर ने काग़ज़ात
दिखाए लेकिन सर्किल
ऑफिसर ने उन्हें
फेंक दिया और
गाड़ी ज़ब्त कर
ली.''
बिष्ट बताते हैं कि
अगले दिन चीमा
ने जब ज़िला
निर्वाचन अधिकारी से इसकी
शिक़ायत की तो
उन्होंने गाड़ी को छोड़ने
का आदेश दिया
गया, लेकिन आदेश
के बावजूद पुलिस
ने गाड़ी नहीं
छोड़ी जिसके विरोध
में चीमा धरने
पर बैठ गए
और पुलिस ने
उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.
बिष्ट का दावा
है कि चीमा
की गिरफ़्तारी असंवैधानिक
है, इसलिए उन्होंने
अपनी ज़मानत की
अर्ज़ी नहीं दी
है और वे
अब जेल में
बंद रहकर ही
चुनाव लड़ेंगे.
बिष्ट का कहना
है कि इस
पूरे मामले से
आम आदमी पार्टी
के आला नेताओं
को अवगत कराया
गया है.
उनका कहना है
कि राष्ट्रीय स्तर
के नेताओं को
इस मामले पर
बोलना चाहिए, जो
इस मामले पर
अब तक ख़ामोश
हैं.


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