नई दिल्ली। अपनी ऐतिहासिक सफलता का जश्न मना रही 'आम आदमी पार्टी के लिए अब मुश्किलों का दौर शुरू हो चुका है। बताया जा रहा है कि 'आप' के पांच असंतुष्ट विधायक भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। सूत्रों के अनुसार अरविंद केजरीवाल के मंत्रिमंडल के गठन के वक्त विनोद कुमार बिन्नी ने जो बगावती सुर अलापे थे उसे लोकसभा में टिकट देने की बात कहकर शांत कर दिया गया था, वहीं आज बिन्नी ने आरोप लगाये है कि 'आप' के ज्यादातर फैसले कांग्रेस करती है, जिसका मकसद भाजपा को सत्ता में आने से रोंकना है।
अब यह भी खबरें आ रही हैं कि 'आप' के पांच विधायक भाजपा के दो बड़े नेताओं के संपर्क में हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि पूर्व भाजपा सदस्य और वर्तमान 'आप' विधायक टीना शर्मा के अलावा कैप्टन गोपीचंद ने भी रिटेल के मुद्दे पर पार्टी नेताओं से नाराजगी जताई है। इसके पहले भी नितिन गडकरी ने आरोप लगाये थे कि एक बिजनेस मैन की मदद से आप और कांग्रेस के बीच समझौता करवाया गया है। जिस पर केजरीवाल ने उनसे सबूत उपलब्ध करवाने की बात कही थी।
भाजपा ने अभी तक 'आप' के घटनाक्रम पर कुछ भी नहीं कहा है। सूत्रों के अनुसार पश्चिमी दिल्ली के दो विधायक भाजपा नेताओं से मिलकर अपनी नाराजगी दिखा चुके हैं लेकिन वह पार्टी नहीं छोड़ना चाहते हैं। 'आप' में मची उथल पुथल पर टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी का कहना है कि केजरीवाल ने पहले अन्ना हजारे से वादा किया था कि वह राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे लेकिन फिर उन्होने पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया। उनका कहना है कि जनता वोट की कीमत चाहती है, अगर उसके वादे पूरे नहीं होते हैं तो वह किसी अन्य विकल्प की तलाश करती है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सत्ता परिवर्तन कर देश भर में लोकप्रियता हासिल की है लेकिन अब पार्टी में मची उथल पुथल के कारण पार्टी के प्रति पूरे देश में एक नकारात्मक संदेश जाएगा, जो कि अन्य पार्टियों के लिए एक माहौल पैदा करेगा।

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