गाजियाबाद ! देश की राजधानी दिल्ली के विधानसभा चुनावों में अप्रत्याशित जीत हांसिल कर सत्तासीन हुई आम आदमी पार्टी (आप) के हौंसले काफी बुलन्द हैं। राजनीति में परिवर्तन का दम भरने वाली आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव में भी दिल्ली की तर्ज पर इतिहास दोहराने के मूड में नजर आ रही है। देश भर में बढ़ रही आप की लोकप्रियता का ही नतीजा है कि आप ने देश भर में उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों समेत लगभग तीन सौ सीटों पर लोकसभा चुनाव लडने का ऐलान कर दिया है। आप किसी भी राष्ट्रीय नेता को वॉक ओवर देने के मूड़ में नहीं है। यही वजह है कि आप ने दिल्ली से सटे गाजियाबाद लोकसभा सीट पर भी अपनी नजर पैनी कर दी है।
गाजियाबाद सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती रही है। भाजपा के टिकट पर पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर यहां से चार बार जीत दर्ज कर देश की सबसे बड़ी पंचायत में बैठ चुके हैं। वो बात अलग है कि उन्होंने राजनाथ सिंह के आने के बाद कांग्रेस का दामन थाम लिया। यही वजह थी कि पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अपने लिए इस सीट को चुना और यहां से चुनाव लड़कर जीत हांसिल की। लेकिन इस बार राजनाथ की राह में आप न सिर्फ रोड़ा बनकर सामने आई है। बल्कि वीआईपी सीट मानी जाने वाली गाजियाबाद सीट पर वह अपने कद्दावर मंत्री मनीष सिसौदिया को यहां से चुनावी मैदान में उतार सकती है। माना जा रहा है कि जिस ठाकुर समाज के वोट बैंक की बदौलत राजनाथ सिंह यहां से चुनाव जीते थे उसी समाज से मनीष सिसौदिया भी आते हैं। पार्टी सूत्रों की माने तो गाजियाबाद लोकसभा सीट में आने वाले ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र साठा चौरासी के किसी गांव में एक बड़ी जनसभा कर चुनाव का आगाज हो सकता है। उसके लिए आप के उम्मीदवार की ठोस जमीन तैयार करने की रणनीति बनाई जा रही है। बता दें कि आप की सरकार में सेकेंड पॉजीशन पर माने जाने वाले मनीष सिसौदिया साठा चौरासी के गांव फगौता के ही मूल निवासी है। आप के सूत्रों की मानें तो मनीष सिसौदिया की उम्मीदवारी का ऐलान एक सभा के दौरान साठा चौरासी के लोगों द्वारा ही कराया जाएगा। पार्टी फिलहाल यह मंथन कर रही है कि यह सभा किस गांव में कराई जाए। इसके लिए क्षेत्र के कुछ नेताओं से पार्टी संपर्क में है। सभा कराने की जिम्मेदारी आप की कोर कमेटी के वरिष्ठ सदस्य संजय सिंह को सौंपी गई है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इन गांवों को भाजपा का ही गढ़ माना जा रहा है। आप की कोशिश होगी कि साठे के इन गांवों के जरिए ही पार्टी की ग्रामीण मतदाताओं के बीच घुसपैठ बनाई जाए। आम आदमी पार्टी अगर अपने मकसद में कामयाब रही तो निश्चित तौर पर भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। साठे गांवों की बात की जाए यहां लगभग डेढ़ लाख वोटर है। खास बात यहां की यह है कि राजपूत और मुसलमानों में मजबूत गठजोड़ रहता है। वैसे भी यह जग जाहिर है कि मुस्लिम समाज अधिकांशतय: भाजपा को हराने वाले प्रत्याशी के पक्ष में वोट करना पसंद करता है। आप की कोशिश होगी कि वह इन गांवों में पैठ बनाकर राजनाथ की जमीन को कमजोर करे।
इतिहास गवाह है कि गाजियाबाद लोकसभा, विधानसभा सीटों समेत नगर निगम चुनावों में भाजपा का ही वर्चस्व रहा है। जिसका फायदा भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भी मिला था लेकिन यह बात और है कि राजनाथ सिंह ने अपने चुनाव के दौरान जो बड़े-बड़े दावे गाजियाबाद की जनता के बीच किए थे उन्हें वह जमीनी हकीकत पर उतारने में नाकाम रहे है। राष्ट्रीय नेता के नाम पर राजनाथ को वोट करने वाली गाजियाबाद की जनता पांच सालों तक खुद को ठगा सा महसूस करती रही। यही वजह थी कि गाजियाबाद की जनता ने विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूरी तरह नकार दिया था। गाजियाबाद लोकसभा के अन्तर्गत आने वाली पांच विधानसभाओं गाजियाबाद शहर, साहिबाबाद, मुरादनगर, लोनी व धौलाना में कोई भी भाजपा प्रत्याशी जीत हांसिल नही कर सका। लगभग साढ़े 23 लाख मतदाताओं वाली गाजियाबाद लोकसभा सीट पर ग्रामीण मतदाताओं के मुकाबले शहरी वोटर अधिक है। जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाई है उससे माना जा रहा है कि आप यहां भी भाजपा का गणित बिगाड़ सकती है। एक वजह यह भी है कि आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल गाजियाबाद की साहिबाबाद विधानसभा में रहते हैं। जिसके कारण उनका यहां के मतदाताओं पर खासा असर दिख रहा है। आप के जिला संयोजक देवेन्द्र सिंह की माने तो गाजियाबाद में अब तक लगभग 50 हजार लोगों ने आप की सदस्यता ले ली है और यह अभियान अभी जारी है। आप की दर्जनों टीमें पहले से ही गली-गली जाकर सभी क्षेत्रों में लोगों को आकर्षित करने में लगी हैं। आप की जो रणनीति यहां दिखाई पड़ रही है उससे कहना गलत न होगा कि आप भाजपा के साथ अन्य दलों की मुश्किलें भी बढ़ा सकती है।


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