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Sunday, 29 December 2013

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आम आदमी पार्टी के 6 बड़े वादेः क्या कर सकते हैं केजरीवाल ?



नई दिल्ली अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए हैं और पूरे ऐक्शन में भी दिख रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि क्या वह जनता से किए गए अपने वादे पूरे कर पाएंगे? कांग्रेस के तेवर देखकर माना जा रहा है कि वादे पूरे करने के लिए उनके पास समय बहुत कम है। आइए आपको बताते हैं 6 बड़े वादे पूरे करने में क्या है उनके सामने सबसे बड़ी अड़चन और कैसे वह इससे निपट सकते हैं।
1-पानी का वादा
केजरीवाल ने चुनाव में हर परिवार को 700 लीटर पानी मुफ्त देने का वादा किया है। केजरीवाल को भरोसा है कि वह यह करके भी दिखा देंगे। माना जा रहा है कि वह इसको लेकर एक-दो दिन में ऐलान कर सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वाकई संभव है?हकीकतः दिल्ली में पानी सप्लाई का सिस्टम बड़ा पेचीदा है। दिल्ली जल बोर्ड में जड़ तक करप्शन का बोलबाला है। अगर सरकार हर परिवार को 700 लीटर पानी प्रतिदिन सप्लाई करती है तो उससे उसे हर दिन 2,405.2 मेगा लीटर पानी की जरूरत होगी।
अभी दिल्ली में पानी सप्लाई की क्षमता 3,799.25 मेगा लीटर प्रतिदिन है। इसमें से 50 पर्सेंट पानी लीकेज और पानी माफियाओं की चोरी से बर्बाद चला जाता है। 2011 की दिल्ली आर्थिक जनगणना के मुताबिक 20 पर्सेंट परिवारों तक पानी की पाइपलाइन भी नहीं है।क्या कर सकते हैं केजरीवाल: केजरीवाल को पूरे सिस्टम को बदलना होगा। वह इसकी शुरुआत पहले दिन से दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ को बदलकर कर चुके हैं। केजरीवाल की दूसरी चुनौती पानी माफियाओं पर शिकंजा कसना होगा, जिनका बिजनस दिल्ली में दिनोंदिन फलफूल रहा है।
2-बिजली का वादा
केजरीवाल ने दिल्लीवालों को 24 घंटे बिजली देने और उसे 50 पर्सेंट सस्ती करने का वादा किया है। लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक केजरीवाल के लिए यह इतना आसान नहीं होगा।
हकीकतः केजरीवाल के लिए बिजली के दाम बिना सब्सिडी के 50 पर्सेंट घटाना नामुमकिन सा है। सब्सिडी देने पर चार हजार करोड़ की जरूरत होगी। दूसरी परेशानी बिजली कंपनियों के लेकर है। बिजली कंपनियों के मुताबिक उन्हें सालाना 11 हजार करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। उधर, BSES राजधानी दिल्ली में बिजली के दाम 3 पर्सेंट बढ़ाना चाहती है। BSES यमुना भी 2 से सात पर्सेंट की बढोतरी चाहती है।क्या कर सकते हैं केजरीवाल: केजरीवाल अगर तुरंत इस पर कोई फैसला करते हैं, तो इसके लिए उन्हें सब्सिडी देनी पड़ेगी। इसके लिए दिल्ली सरकार को 4 हजार करोड़ का भारी फंड चाहिए। सरकार के पास एकमात्र ऑप्शन दिल्ली सरकार का खजाना है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वह इतना बड़ा बोझ उठा पाएगा। इसके लिए बिजली कंपनियों का ऑडिट भी करना होगा। यह असंभव नहीं है, लेकिन इसमें काफी वक्त लग सकता है।
3-शिक्षा का वादा
आप ने चुनाव में 500 नए स्कूल और सरकारी शिक्षा में सुधार का वादा किया है। नर्सरी ऐडमिशन में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी खत्म करने का ऐलान भी किया गया है।
हकीकतः सरकार के लिए दिल्ली के अंदर 500 स्कूलों के लिए जमीन खोजना सबसे बड़ी मुश्किल होगी। इन स्कूलों में अच्छे टीचरों के सिलेक्शन और उनकी ट्रेनिंग भी बड़ा चैलेंज होगा।
क्या कर सकते हैं केजरीवालः केजरीवाल को इसके लिए प्राइमरी शिक्षा से शुरुआत करनी होगी। सरकारी स्कूलों में बेसिक टीचरों का ट्रेंड करना होगा। टीचरों को समय-समय पर ट्रेनिंग और रिफ्रेशिंग कोर्स कराने होंगे, जिससे वे सिलेबस को लेकर अपेडट रह सकें। तय करना होगा कि बच्चों को समय पर किताबें, यूनिफॉर्म, स्कॉलरशिप मिलें। यह काम ठीक से हुआ है या नहीं इसका ऑडिट करवाना होगा। दिल्ली के स्कूलों का थर्ड पार्टी से ऑडिट कराना होगा। स्कूलों को बेसिक सुविधाओं जैसे लाइब्रेरी, फर्नीचर, प्लेग्राउंड आदि से लैस करना होगा। नर्सरी ऐडमिशन को लेकर शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया नई गाइडलाइंस का ऐलान कर चुके हैं। सरकार को अपने फैसलों पर निजी स्कूलों की धौंस के आगे मजूबती से टिके रहना होगा।
4-अनधिकृत कॉलोनियां को नियमित करने का वादा
दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों में 60 लाख लोग रहते हैं। सालों से भू माफिया स्थानीय नेताओं की साठगांठ से खेती की जमीन पर कॉलोनियां काटते रहे। इस रैकेट में भारी पैसा फंसा हुआ है। दिल्ली मेंअधिकतर अवैध कॉलोनियां इसी तरह अस्तित्व में आई हैं।
हकीकतः दिल्ली में 18 हजार किलोमीटर सीवरलाइन की जरूरत है, लेकिन स्थिति यह है कि इसके आधा ही मौजूद हैं।क्या कर सकते हैं केजरीवालः अवैध निर्माण की असली जड़ करप्शन है। हर अवैध निर्माण की पुलिस और स्थानीय प्रशासन को खबर रहती है। केजरीवाल को पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर शिकंजा कसना होगा। आदमी आदमी पार्टी को इस मामले पर वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर काम करना होगा। उसे अवैध निर्माण पर स्टैंड क्लियर करना होगा। बीजेपी और कांग्रेस अभी तक इस पर वोट बैंक की राजनीति ही करती रही हैं।
5-बेहतर स्वास्थ्य सेवा का वादा
केजरीवाल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का वादा करके भी सत्ता में आए हैं। उन्होंने नए हॉस्पिटल खोलने का भी वादा किया है।
हकीकतः केजरीवाल को इसके लिए डीडीए से जमीन की जरूरत होगी। डीडीए केंद्र के शहरी विकास मंत्रालय के अंदर आता है। जमीन को लेकर यहां पेच फंस सकता है। दूसरी चुनौती सरकारी अस्पतालों को सक्षम डॉक्टरों और संसाधनों से लैस करना है। इसके लिए भी फंड की जरूरत होगी।
क्या कर सकते हैं: अगर जमीन मिलने में दिक्कत आती है तो केजरीवाल कम से कम अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ा सकते हैं। रात में इमर्जेंसी सर्विस को और बेहतर करने की जरूरत है। इसके लिए स्टाफ भी बढ़ाना होगा। लापरवाह डॉक्टरों को सजा और ईमानदार सरकारी डॉक्टरों को उनके काम के लिए लगातार प्रोत्साहित करना होगा। दिल्ली के हेल्थ मिनिस्टर का पद संभालने के बाद सत्येंद्र कुमार जैन ने शनिवार रात जिस तरह से दिल्ली सरकार के 5 अस्पतालों का अचानक दौरा किया, उससे उम्मीद बंधती है।
6-महिला सुरक्षा का वादा
दिल्ली में महिला सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। केजरीवाल ने महिलाओं के लिए स्पेशल सिटीजन सिक्यॉरिटी फोर्स बनाने का ऐलान किया है, जो उन्होंने मुसीबत के समय सुरक्षा देगा।
हकीकतः स्पेशल सिटीजन सिक्यॉरिटी फोर्स बनाना केजरीवाल के लिए अभी संभव नहीं होगा। यह दिल्ली पुलिस के अंदर आता है। नई फोर्स के बजाय केजरीवाल को दिल्ली पुलिस के 70 हजार जवानों को मैनेज करने पर ध्यान लगाना होगा।वह क्या कर सकते हैं केजरीवाल: वीआईपी सिक्यॉरिटी में लगे पुलिसकर्मियों को हटाएं। पुलिस अफसरों के घर पर सेवकों के तौर पर तैनात पुलिसकर्मियों को हटाएं। 30 पर्सेंट पुलिस फोर्स वीआईपी की सिक्यॉरिटी में है। अंग्रेजों के जमाने के नियम को बदलना होगा, जिसके कारण कम रैंक के अधिकारी को ऑपरेशनल अधिकार और अडवांस्ड प्रफेशनल ट्रेंनिग नहीं मिल पाती। यह भी तय करना हो कि पुलिस के अधिकारी वीआईपी के आगे-पीछे चक्कर लगाएं और सड़क पर मुस्तैद नजर आएं। (साभार nbt)



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